रविवार, 2 दिसंबर 2018

अरुण जेटली का कार्यकाल


अरुण जेटली का कार्यकाल

जेटली 1991 से भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रिय कद के नेता हैं। आज हम इस आर्टिकल में बताएँगे कि उनका सफर कैसा रहा। उन्होंने छात्र नेता से अपना सफर शुरू किया फिर सुप्रीम कोर्ट में वकील रहे लेकिन आज हम यहाँ उनका राजनीतिक सफर डिसकस करेंगे जो कि अच्छी तरह से 1991 में शुरू हुआ जब वो बीजेपी के नेशनल एग्जीक्यूटिव बन गए। 1999 के आम चुनावो में उन्होंने भाजपा के प्रवक्ता की भूमिका भी निभाई। 

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एल के अडवाणी अरुण जेटली और अटल बिहारी वाजपेयी 
1999 में वाजपेयी सरकार में 13 अक्टूबर 1999 को अरुण जेटली को इनफार्मेशन & ब्रॉडकास्टिंग के राज्य मंत्रालय का दायित्व सौपा गया। 23 जुलाई 2000 को जब राम जेठमलानी ने अपने कानून मंत्रालय के पद से इस्तीफ़ा दिया तो वो मंत्रालय भी जेटली को सौपा गया। पार्टी ने शुरू से ही अरुण को काफी जिम्मेदार समझा और उन्हें जब भी जरुरत पड़ी उन्होंने अरुण जेटली को अतिरिक्त मंत्रालय के बीच बीच में जिम्मेदारी सौपी जाती रही। ये एनडीए की सरकार का कार्यकाल था।
नवम्बर 2000 में उन्हें केबिनेट मिनिस्टर बना दिया गया और कानून मंत्रालय का पूर्ण भार अरुण जेटली के दायरे में आ गया। 01 जुलाई 2002 को उन्होंने मंत्री पद छोड़कर बीजेपी के महा सचिव और राष्ट्रिय प्रवक्ता का पद संभाल लिया। और जनवरी 2003 तक इसी पद पर कार्य किया। फिर जनवरी 2003 में फिर से कानून मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री बन गयी। मई 2004 में एनडीए सरकार को हार देखनी पड़ी तो अरुण जेटली फिर से बीजेपी के महा सचिव बन गए और साथ ही फिर से उन्होंने वकालत का कार्य शुरू कर दिया। 

03 जून 2009 को अरुण जेटली को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष चुना गया। क्योकिं बीजेपी में कोई भी नेता दो पद पर नहीं रह सकता ऐसा नियम है इसलिए उन्होंने भाजपा सचिव का पद छोड़ दिया। राजयसभा का नेता रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर कार्य किया। महिला आरक्षण बिल और अन्ना हजारे के जन लोकपाल बिल को समर्थन दिया। उनके नेतृत्व में संविधान में 84वां संशोधन (2002) और 91वां संशोधन (2004) में हुआ। 
84वां संशोधन संसदीय सीट की संख्या 2026 तक फिक्स करने के लिए किया गया। 2014 में नवजोत सिंह सिद्धू की जगह अमृतसर से चुनाव लड़ा लोकसभा का लेकिन उन्हें कांग्रेस के अमरिंदर सिंह ने हरा दिया। वह गुजरात से राज्य सभा में थे 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से फिर से राज्यसभा में आ गए। 

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी सरकार में इन्हे केबिनेट मिनिस्टर बना दिया गया। इन्हें वित्त मंत्रालय सौप दिया गया।  बीच में कई बार रक्षा मंत्रालय और कॉर्पोरेट अफेयर मंत्रालय भी अतिरिक्त भार के रूप में इन्हे दिया गया। काफी अनुभवी नेता हैं इसलिए इनपर काफी जिम्मेदारी रहती हैं। भारत सरकार में अपने रोल के अलावा ये एशियाई विकास बैंक के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स का हिस्सा हैं। 
इन्होने आय घोषणा योजना 2016 की अनाउंसमेंट की जिसके तहत आप अपनी संपत्ति की घोषणा करके टैक्स चुकाकर उसे ब्लैक से वाइट कर सकते थे इसमें इस अनकथित आय पर 30 प्रतिशत टैक्स देना था और फिर 25 प्रतिशत सरचार्ज भरना था। 
09 नवंबर 2016 को इनके कार्यकाल में ही ब्लैक मानी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए 500 और 1000 के उस समय के पुराने नोटों का विमुद्रीकरण हुआ। ये नोटबंदी काफी कठिन कदम था इसने पूरे देश को हिला कर रख दिया था 
01 जुलाई 2017 को इन्होने ही गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स जीएसटी की शुरुआत लगभग देशभर के सभी राज्यों में कर दी। अभी कार्यकाल जारी है देखते हैं आगे क्या क्या होता है जेटली जी के कार्यकाल में। 
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