शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

न्यूटन जी ने फाॅर्स यानि बल की खोज कैसे की ?


न्यूटन जी ने फाॅर्स यानि बल की खोज कैसे की ?

जी हाँ आप सही सोच रहे हैं सर आइज़क न्यूटन (Isaac Newton) की ही बात कर रहे है और आज चर्चा में ये जानने की कोशिश करेंगे की सबसे पहले उन्हें बल का आभाश कब व कैसे हुआ ?

ये सन 1666 की बात है। ये वो घटना थी जिसने आज का भौतिकी का ज्ञान पुख्ता किया। जब भी हम न्यूटन की बल की खोज की बात करते हैं तो सबसे पहला सिद्धांत(बल) उन्हने दिया था गुरुत्वाकर्षण थ्योरी का सिद्धांत। 
न्यूटन उस समय भौतिक वायुमंडल के काफी मुद्दों को लेकर रिसर्च करने में लगे थे और वो ये जानने की कोशिश कर रहे थे कि चन्द्रमा किस तरह से पृथ्वी की परिक्रमा करता रहता है और ऐसी क्या क्रियाएं हैं जो इस सिद्धांत पर कार्य करती है. वो उस लंदन की रॉयल सोसाइटी से जुड़े हुए थे। एक दिन वह लिंकनशायर में अपनी माँ के घर के बगीचे में एक सेब के पेड़ के नीचे बैठे कुछ अध्ययन कर रहे थे। और वह उस समय ऐसे की कुछ भौतिकी रहस्यों के बारे में सोच रहे थे कि अचानक उनके सिर पर एक सेब गिरा और उसने सर आइजक को काफी कुछ सिखा दिया। न्यूटन को पहली बार अपनी खोज में एक बहुत ही सकारात्मक सफलता महसूस हुई। उन्हें लगा की उनको कुछ प्रश्न का उत्तर उन्हें मिल चुका है। 
वह समझ चुके थे कि पृथ्वी किस तरह हर वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है उस पर एक बल लगाती है जिससे एक सेब उनके ऊपर गिरा। उसके बाद उन्होंने कई प्रयोग किये जैसे उसी सेब को फिर से ऊपर फेंक के देखना और ये निष्कर्ष पर पहुंचना की ऊपर फेंकने के बावजूद भी वह फिर से नीचे आके जमीन पर गिरती है। इन्ही सब प्रयोग के बाद उन्होंने लॉ ऑफ़ ग्रेविटी यानि गुरुत्वाकर्षण थ्योरी पेश की। 
उन्होंने बताया की ब्रह्माण्ड में मौजूद हर दो वस्तुओं के बीच एक आकर्षक बल लगता है जिसके जरिये वो एक दूसरे के करीब जाते है और यह बल हर छोटी बड़ी वस्तुएं महसूस करती हैं जैसे सूरज और पृथ्वी के बीच ,  पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच , पृथ्वी और मानव के बीच। इस बल की मात्रा जानने के लिए उन्होंने एक फार्मूला भी दिया। और बताया किस तरह दोनों वस्तुओं का वजन और उनके बीच की दुरी से ये बल प्रभावित होता है। 


यानि गुरुत्वावकर्षण बल = गुरुत्वाकर्षण कांस्टेंट x पहली वस्तु  का वजन x  दूसरी वस्तु का वजन / वस्तुओं के बीच की दूरी का वर्ग 
इसी फॉर्मूले के हिसाब से दोनों वस्तुओं के बीच एक आकर्षित बल लगता है जिसे गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं। 

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