बुधवार, 21 नवंबर 2018

फिल्म बाग़बान से मिली कुछ अमोल सीखें


फिल्म बाग़बान से मिली कुछ अमोल सीखें

आज हम जानेगे इस 03 अक्टूबर 2003 को रिलीज़ हुई अमिताभ बच्चन व हेमा मालिनी की फिल्म के बारे में जिसने मूवी के बहाने बहुत कुछ लाइफ से जुडी सच्चाई सामने रखी।  इस फिल्म में इनके अलावा सलमान खान, महिमा चौधरी, परेश रावल, रिमी सेन व कई सारे अन्य कलाकारों ने अहम् भूमिका में काम किया है। 

बागबान 2003 फिल्म Hindi 365
बागबान 2003 फिल्म Hindi 365
अधिकतर लोगों ने वैसे बाग़बान फिल्म देख ली होगी लेकिन इन बातों पर शायद अच्छे से गौर नहीं किया होगा। आज में इस आर्टिकल से बताऊंगा कि हमें इस फिल्म से क्या सीख मिलती है जो कि आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण शाबित होगी। 
1. फिल्म की कहानी कुछ अमिताभ बच्चन की इन पंक्तियों से शुरू होती है -
बाग़ को जन्म देने वाला बाग़बान (माली -Gardner )
परिवार को जन्म देने वाला पिता 
दौनो ही अपने खून पसीने से अपने पौधों को सींचते हैं 
न सिर्फ अपने पेड़ से बल्कि उसके साये से भी प्यार करते हैं 
क्योंकि उसे उम्मीद है कि एक रोज जब वो जिंदगी से थक जायेगा यही साया उसके काम आएगा। 

क्या खूबसूरत बात कही गयी है इन पंक्तियों में। हमें ये बात सीखना जरुरी है कि जीवन चक्र चलता रहता है। जो आज जवान है वो कुछ समय पश्चात् बूढ़ा जरूर होगा। जो बच्चा है वो कल पिता बनेगा तो एक बच्चे को अपने माता पिता की उम्मीदों को कभी तोडना नहीं चाहिए। क्योकि बहुत उम्मीदों के साथ काफी सींच सींच कर उन्होंने आपको पाल पोषकर बड़ा किया है। और अगर आप उनका आज साथ नहीं दोगे तो वही आपके बच्चे सीखेंगे और कल आपके बुढ़ापे में वो आपका साथ नहीं देंगे क्यूंकि वैसा उन्होंने सीखा ही नहीं है। जैसी करनी वैसी भरनी। जब आप इस फिल्म को देखते हैं तो ऊपर लिखा हर वाक्य इससे साबित होता है क्यूंकि असल जिंदगी भी वही है। 

2. इस मूवी में एक डायलॉग है - होता तो सबके पास है लेकिन दिमाग वही जो वक्त पर काम आये। ये बिलकुल सही और सटीक सीख है। चाहे आप कितने भी बुद्धिमान क्यों न हों लेकिन यदि आपने कभी दिमाग की लापरवाही की वजह से एक गड़बड़ी कर दी तो आप का दिमाग उस समय किसी काम का नहीं। फिर बाद में आप उस गलती के कितने भी पश्चाताप करते रहे अपने उस दिमाग से। दिमाग का सही समय पर काम करना है जरुरी। 

3. जिस तरह अमिताभ बच्चन पूरी फिल्म में हेमा मालिनी की तारीफ करते रहते है। उसी तरह हर पति को अपनी पत्नी की थोड़ी थोड़ी तारीफ तो करते ही रहना चाहिए इससे जीवन सुगम बना रहता है और पत्नी भी 10 -20 प्रतिशत तारीफ करती रहे तो भाई सोने पर सुहागा वाली बात हो जाती है। शुरू करके देखिये जल्द ही बदलाव नजर आएगा। 

4 पत्नी को गिफ्ट देने से काफी बड़े युद्ध होते होते रुक जाते हैं। अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की साल गिरह का फिल्म सीन कुछ ऐसा ही सिखाता है। 

5. प्यार वो दवा है जो रिश्तों को और व्यक्तियों को हमेशा जवान बनाये रखता है। ऐसा इस फिल्म में दिखाया भी गया है और कहीं तक ये सच भी है लेकिन प्यार में सावधानी बहुत जरुरी है। गलत जगह किया गया प्यार या बहुत अधिक मात्रा में किया गया प्यार इंसान को बर्बाद करने के लिए काफी होता है। इसलिए संभलकर करें मगर करें जरूर। 

6. कई बार पराये लोग भी अपने लोगों से ज्यादा प्यार दे सकते हैं। वो आपको सहारा दे सकते हैं। बस नीयत सही होनी चाहिए। अगर आप के पास पैसा है तो लोगों की मदद जरूर करें खासकर अनाथ बच्चों की उन्हें एक अलग जिंदगी देने की कोशिश करें। ये जरूर काम आएगा। 

7.  जो कुछ भी आप कमाते हैं उसे पूरा खर्च न करें। थोड़ा थोड़ा अपने रिटायरमेंट के समय को देखते हुए इन्वेस्ट जरूर करके रखें। चाहे आप आज कितना भी कमाते हो लेकिन एक दिन आपको काम करना बंद करना ही पड़ता है। तब आपका पुराना काम इतनी मदद नहीं कर पाता जितनी मदद आपके जमा किये पैसे कर पाते हैं। 

8. जब आप किसी के कुछ काम आ रहे होते हैं तो तब आप से दूसरे लोग कितना प्यार सच्चा करते हैं ये पता नहीं चलता। ये आपको तब पता चलता है जब आप उनके काम न आने के बजाय कुछ दिन उनके सहारे गुजारना शुरू करें। फिल्म में अमिताभ के बच्चे जब तक अमिताभ अपने अलग घर में रहते थे बच्चों की मदद करते रहते थे तो उन्हें बहुत प्यार करते थे लेकिन अमिताभ और हेमा मालिनी जब वास्तव में बच्चों में अपना सहारा खोजने लगे। जब अपने बच्चों के साथ रहने लगे तो बच्चों के प्यार के एक अलग नजारा देखने को मिला। 

9 . अगर पूरी फैमिली प्रेमभाव के साथ एक साथ रहे तो हर दिन होली और हर दिन दिवाली की तरह गुजरता है लेकिन ये तथ्य अब उतना प्रभावशाली नहीं रहा है। अब न तो साथ रहना मुमकिन हो पाता है और न ही साथ रहने पर इतना प्रेमभाव। फिल्म के मध्य तक पहुँचने पर ही आपको पता चल जाता है कि ये बात पूरी तरह ठोस नहीं है आज के ज़माने में। 

10 . अपने बच्चो को थोड़ा सा अपने नियंत्रण में जरूर रखें और उनपर ध्यान जरूर रखें। फिल्म में रीमा सेन को अमिताभ और हेमा मालिनी की पोती दिखाया है। एक सीन में यदि हेमा मालिनी अगर उस डांस बार में रीमा का पीछा करते हुए नहीं पहुँचती तो कुछ भी अनर्थ हो सकता था। मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि अपने बच्चो पर शक करें और उनका पीछा करें लेकिन थोड़ी नजर रखना आवश्यक है। 

ये कुछ सीख है जो मैंने ये फिल्म देख के लिखीं। इस फिल्म में ऐसी और भी बहुत सी सीख हैं जो मैंने नहीं लिखी। अगर आप को पता है तो कमेंट करके बताएं। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगी हो तो एक शेयर जरूर करें। 
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