सोमवार, 19 नवंबर 2018

अमिताभ बच्चन का सिलसिला फिल्म का डायलाग


अमिताभ बच्चन का सिलसिला फिल्म  का डायलाग 

अगर आपने सिलिसिला फिल्म देखी होगी तो ये डायलॉग के आप पहले से ही दीवाने होंगे और अगर नहीं देखी है तो आप आज दीवाने हो जायेंगे। आइये पढ़ते हैं ये मौहब्बत भरा डायलॉग

अमिताभ रेखा सिलसिला फिल्म - Hindi365
अमिताभ रेखा सिलसिला फिल्म - Hindi365

 "मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं      
तुम होती तो कैसा होता ? तुम ये कहती तुम वो कहती। तुम इस बात पर हैरान होती। तुम उस बात पर कितना हंसती ? तुम होती तो ऐसा होता    तुम होती तो वैसा होता

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते हैं

ये रात है या तुम्हारी जुल्फे खुली हुई हैं    ऐ चांदनी या तुम्हारी नजरों से मेरी रातें धुली हुई हैं   ये चाँद है या तुम्हारा कंगन    सितारे हैं या तुम्हारा आंचल      हवा का झौंका है या तुम्हारे बदन की खुशबु   ये पत्तियों की हर सरसराहट    कि तुमने चुपके से कुछ कहा है   ये सोचता हूँ में कब से गुमशुम   कि जबकि मुझको भी ये खबर है  कि तुम नहीं हो   कहीं नहीं हो   मगर ये दिल है कि कह रहा है   कि तुम यहीं हो   यहीं कहीं हो     मजबूर ये हालात इधर भी है उधर भी है     तन्हाई की एक रात  उधर भी है इधर भी है     कहने को बहुत कुछ है मगर किससे कहें हम    कब तक यूँही खामोश रहे और सहें हम   दिल कहता है कि दुनिया की हर एक रस्म उठा दें    दीवार जो हम दोनों में है आज गिरा दें   क्यों दिल में सुलगते रहें लोगों को बता दें    हाँ हमको मोहब्बत है   मोहब्बत है    मोहब्बत .     अब दिल में यही बात इधर भी है उधर भी है "
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