शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

यमक अलंकार


यमक अलंकार

इस आर्टिकल में हमने यमक अलंकार पर विस्तार से चर्चा करने की कोशिश की है। आशा है आपको तुरंत समझ आ जाएगा।परिभाषा के साथ यमक अलंकार के उदाहरण भी दिए हैं जिससे आप अच्छी तरह से समझे। 
यमक अलंकार की परिभाषा:
ये तो आपको पता ही होगा अलंकार क्या होता है - अलंकार यानि किसी वाक्य छंद अथवा काव्य के शोभात्मक शब्दों को कहते है। अलग अलग तरह से प्रयोग होने के आधार पर कई तरह के अलंकार होते हैं। यमक अलंकार तब होता है जब कोई शब्द बार बार आये लेकिन उसका अर्थ अलग हो। इसे निम्न पंक्ति के माध्यम से भी आप याद कर सकते हैं -
वही शब्द पुनि - पुनि परै, अर्थ भिन्न ही भिन्न

यमक अलंकार के उदाहरण:
वह तीन बेर खाती थी अब तीन बेर खाती हैं
इस पंक्ति में बेर शब्द दो बार आया है लेकिन बेर शब्द के दोनों जगह अर्थ अलग है। पहले बेर का मतलब बेर फल से है लेकिन दूसरे बेर का मतलब बार से है। इस पंक्ति का अर्थ है - वह तीन बेर खाती थी अब वह तीन बार खाती है। 

कनक कनक तै सौ गुनी मादकता अधिकाय
वा खाए बौराए जग या पाए बौराये
इस ऊपर लिखी पंक्ति में कनक शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है लेकिन दोनो ही बार कनक शब्द का मतलब अलग है। जहाँ पहले कनक का अर्थ सोना है वहीँ दूसरे कनक का अर्थ धतूरा है। इसलिए इसमें यमक अलंकार है। 

काली घटा का घमंड घटा 
इस पंक्ति में भी यमक अलंकार है क्योंकि पहले शब्द घटा का अर्थ है - बादल की घटा और दूसरे घटा शब्द का अर्थ है कम होना। 

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन फेर
करका मनका डारि दै, मन का मनका फेर
इन पंक्तियों में मनका शब्द की दो बार आवृति हुई है और दोनों ही बार इसका अलग अर्थ है एक जगह इसका अर्थ है भजन करने की माला और दूसरी जगह इसका अर्थ हमारे मन से है। इसलिए यहाँ भी यमक अलंकार है। 

कुछ अन्य यमक अलंकार के उदहारण :

पच्छी परछीने ऐसे पर छीने बीर|
तेरी बरछी ने बर छीने हैं खलन के|

कहे कवि बेनी बेनी ब्याल की चुराई लीनी|

गुनी गुनी सब के कहे, निगुनी गुनी न होत|
सुन्यौ कहूँ तरु अरक तें, अरक समानु उदोत||

ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहन वारी|
ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहाती है||

जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं। 

बरजीते सर मैन के, ऐसे देखे मैं न हरिनि के नैनन ते हरिनि के ये नैन 

उधो जोग जोग हम नाही। 

त्यों रसखानि वही रसखानि जु है रसखानि सो है रसखानि 
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