गुरुवार, 15 नवंबर 2018

अनुलोम विलोम प्राणायाम


अनुलोम विलोम प्राणायाम

अनुलोम विलोम प्राणायाम एकआसान सा दिखने वाला लेकिन बहुत ही सावधानी पूर्वक करने वाला एक कठिन योग है| जिसको करने से यह कई प्रकार की बीमारियों को ठीक करता है| अनुलोम विलोम  का अर्थ है- सीधा, विलोम का मतलब है उल्टा, जिसका संबंध हमारी नासिकओ से होता है| यानी कि सीधा और उल्टे नाक का छेद|

अनुलोम-विलोम प्राणायाम को करने का तरीका:
1.आसन पर बैठ जाए अपने सीधे हाथ के अंगूठे से सीधे नासिका को बंद करें उल्टी नासिका से गहरी सांस धीरे धीरे अंदर ले ,फिर सीधे हाथ की रिंग फिंगर से उलटे हाथ की नासिका को बंद करें और साथ-साथ सीधे हाथ के नासिका को खोलें और अंदर की सांस को बाहर छोड़ें|
2.इस प्रक्रिया से जब भी सास को अंदर ले तब आपका पेट बाहर की तरफ निकलना चाहिए और जब सांस बाहर छोड़ें तब आपका पेट अंदर की तरफ जाना चाहिए|
3. हमें यह प्रक्रिया पूरे 5 मिनट तक करनी चाहिए| जिसको सांस की बीमारी हो उनको यह प्रक्रिया आराम आराम से करनी चाहिए|
4. इसी प्रकार उल्टे हाथ के अंगूठे से उल्टी नासिका को बंद करें और सीधी नासिका से सास अंदर की तरफ ले और इसी प्रकार प्राणायाम को करें|

अनुलोम विलोम प्राणायाम दिन में कितना और कितनी बार कर सकते हैं ?
अनुलोम विलोम प्राणायाम एक समय में अपनी शारीरिक सुविधानुसार 5 मिनट से लेकर 20 मिनट तक करना चाहिए। और दिन में तीन बार आप यह कर सकते हैं - सुबह, दोपहर व शाम। जब आपका शरीर शांत हो तो इसको धीरे से शुरू करें और फिर धीरे धीरे इसको बढ़ाये। इसका अंत भी धीरे होना चाहिए।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम के लाभ :
1.इसको करने से हमारे शरीर के अंदर कोशिकाएं एक्टिवेट होती हैं|
2.फेफड़ों को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन  मिलती है जिससे वह सही प्रकार से ऑक्सीजन पूरे शरीर में रक्त के द्वारा संचार करते हैं| दिल को स्वस्थ रखता है|
3. मस्तिष्क को प्रबल बनाने के साथ-साथ सशक्त बनाता है|
4.मधुमेह, मोटापे और  एलर्जी की  दिक्कत को नियंत्रित करता है|
5. पाचन क्रिया को सही रखता है|

अनुलोम विलोम करने की सावधानी:
1.जिसको सांस की दिक्कत है उसे अपने डॉक्टर से संपर्क करके करना चाहिए|
2.इसको हमेशा सुबह या शाम को करना चाहिए प्राणायाम को करते समय पेट खाली होना चाहिए|
3. जिसको सांस की दिक्कत है उसे अपने डॉक्टर से कंसल्ट करके यह प्राणायाम करना चाहिए|

खाना खाने के ठीक बाद क्यों नहीं करना चाहिए अनुलोम विलोम प्राणायाम ?
क्योंकि इस प्राणायाम में आप साँस के द्वारा अपने पेट पर दवाव डालते हैं तो खाना खाने के ठीक बाद आपको यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए अन्यथा इसके आपके शरीर पर दुष्प्रभाव होंगे। क्योंकि आपके पेट में खाना भरा होता है तो उस समय उसे दबाना लम्बे समय में कष्टप्रद होगा।

अनुलोम विलोम व नाड़ी शोधन में क्या अंतर है ?
अनुलोम विलोम और नाड़ी शोधन में काफी समानता होने कि वजह से लोग अक्सर इनमे कंफ्यूज रहते हैं अंतर इसमें इतना होता है कि नाड़ी शोधन में साँस को नाशिका में खींचने के पश्चात साँस को थोड़ी देर रोकने का प्रयास करना होता है इसके लिए प्राणायाम करने वाला अपनी नाक के दोनों छिद्रो को साँस भरने के पश्चात बहुत थोड़े समय के लिए बंद करता है। वही अनुलोम विलोम में साँस का प्रवाह जारी रहता है। वहां पर साँस को उतनी देर रोकते नहीं हैं।

क्या अनुलोम विलोम मोटापे को सच में ख़त्म करने में मदद करता है ?
जी हाँ। अनुलोम विलोम प्राणायाम हमारे शरीर का मेटाबोलिज्म बढ़ाता है। जिससे हमारा शरीर और पेट सब स्वस्थ रहते है और मोटापे को नियन्त्रण में इससे मदद मिलती है। इससे आपका वजन बहुत कम हो जायेगा ये मै नहीं कहूंगा बल्कि प्राणायाम से मोटापा नियंत्रण में रहता है इतना कह सकता हूँ।

क्या अनुलोम विलोम हम रात को कर सकते हैं ?
रात को भी आप अनुलोम विलोम कर सकते है बशर्ते आपका पेट खाली हो उस समय। रात को अनुलोम विलोम करने की सबसे बड़ी समस्या होती है रात के समय की वायु जो कि सुबह जितनी शुद्ध नहीं होती है। इसलिए बेस्ट समय तो प्रातः काल का ही है बाकि आप अपनी सुविधा के अनुसार और शरीर की सुविधा के अनुसार इस प्राणायाम को कर सकते हैं। रात को भोजन इत्यादि का भी समय रहता है इसलिए योगिक गुरु ऐसा रिकमेंड नहीं करते बाकि ऐसा कोई नियम नहीं है।

योग करते वक्त पहले कपालभाति करें या अनुलोम विलोम ?
ये वैसे बहुत क्लियर नहीं है इनका ऑर्डर पर अधिकतर योगाचर्य पहले कपालभाती करने की सलाह देते है और बाद में अनुलोम विलोम।
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